Monthly Archives: March 2013

माही की महेराबी आंखो का मयस्सर

माही की महेराबी आंखो का मयस्सर! तेरी आंखो में ना जाने कितने ख्वाब व ख्वाहिशों की शफ़क छायी है मुसब्बर सी, नुमायी सी जन्नत-ए-नूर कि रोशनि और रैना छायी है। मेरे नगमें होले होले गुनगुनाते रहे तेरी पशमी चादर सी … Continue reading

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